शुभ मुहूर्त वह समय है जिसे पंचांग के आधार पर किसी ख़ास काम की शुरुआत के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसे निकालने के लिए पंडित पंचांग के पाँच अंग, यानी तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण देखते हैं, और बड़े कामों के लिए उस समय का लग्न भी मिलाते हैं। रोज़ के छोटे कामों के लिए लोग अभिजीत मुहूर्त या चौघड़िया देख लेते हैं, लेकिन विवाह और गृह प्रवेश जैसे संस्कारों का मुहूर्त पूरी गणना से ही तय होता है।
मुहूर्त निकालने में पंचांग की कौन सी बातें देखी जाती हैं?
- तिथि: चंद्रमा की चाल से बनने वाला दिन। चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी को रिक्ता तिथि कहते हैं और आम तौर पर शुभ शुरुआत के लिए इन्हें टाला जाता है। अमावस्या को भी ज़्यादातर मांगलिक कामों के लिए नहीं चुना जाता।
- वार: हर दिन का एक स्वामी ग्रह होता है। जैसे गुरुवार को पढ़ाई और धार्मिक कामों के लिए और शुक्रवार को सुख-सुविधा की चीज़ें ख़रीदने के लिए अच्छा माना जाता है।
- नक्षत्र: 27 नक्षत्रों में कुछ स्थिर, कुछ चर और कुछ उग्र माने गए हैं। रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती जैसे नक्षत्र कई शुभ कामों में पसंद किए जाते हैं।
- योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बनने वाले 27 योग। व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योग शुभ कामों के लिए टाले जाते हैं।
- करण: तिथि का आधा हिस्सा। विष्टि करण, जिसे भद्रा भी कहते हैं, मांगलिक कामों के लिए अशुभ माना जाता है।
इनके अलावा लग्न भी देखा जाता है, यानी उस समय पूर्व दिशा में उदय हो रही राशि। विवाह और गृह प्रवेश में लग्न की शुद्धि बहुत अहम मानी जाती है, इसलिए एक ही दिन में कुछ घंटे बेहतर और कुछ कमज़ोर हो सकते हैं। बड़े संस्कारों के लिए खरमास, चातुर्मास और गुरु या शुक्र के अस्त होने का समय भी आम तौर पर टाला जाता है।
अभिजीत मुहूर्त क्या है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटा जाता है, और इनमें आठवाँ मुहूर्त अभिजीत कहलाता है। यह स्थानीय दोपहर के आसपास करीब 48 मिनट का समय होता है, यानी दोपहर से लगभग 24 मिनट पहले से 24 मिनट बाद तक। जब किसी काम के लिए अलग से अच्छा मुहूर्त न मिल रहा हो, तब इसे कई कामों के लिए शुभ माना जाता है।
परंपरा में बुधवार के अभिजीत मुहूर्त को आम तौर पर नहीं लिया जाता। यह भी याद रखें कि स्थानीय दोपहर घड़ी के 12 बजे के बराबर नहीं होती। यह आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का समय होता है।
चौघड़िया क्या होता है?
चौघड़िया में दिन और रात, दोनों को 8-8 हिस्सों में बाँटा जाता है, और हर हिस्सा मोटे तौर पर डेढ़ घंटे का होता है। हर हिस्से का एक नाम होता है:
- शुभ माने जाने वाले: अमृत, शुभ और लाभ
- सामान्य, यात्रा के लिए अच्छा: चर, जिसे चल भी कहते हैं
- अशुभ माने जाने वाले: काल, रोग और उद्वेग
वार के हिसाब से दिन की शुरुआत अलग चौघड़िया से होती है, जैसे सोमवार की सुबह अमृत से और रविवार की सुबह उद्वेग से। गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत के व्यापारी परिवारों में दुकान खोलने, यात्रा या किसी जल्दी वाले काम के लिए चौघड़िया खूब देखा जाता है। लेकिन विवाह जैसे बड़े संस्कारों के लिए अकेला चौघड़िया काफ़ी नहीं माना जाता।
गृह प्रवेश, विवाह, नामकरण और वाहन ख़रीद का मुहूर्त कैसे चुनते हैं?
गृह प्रवेश
गृह प्रवेश के लिए आम तौर पर माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ के महीने अच्छे माने जाते हैं, जबकि खरमास और चातुर्मास में इसे टाला जाता है। शुभ तिथि, स्थिर नक्षत्र और शुद्ध लग्न देखकर दिन और समय तय होता है।
विवाह
विवाह मुहूर्त की गणना सबसे विस्तार से होती है। इसमें वर और कन्या दोनों की कुंडली, गुरु और शुक्र का उदित होना, खरमास और चातुर्मास से बचाव, विवाह के लिए शुभ नक्षत्र और लग्न शुद्धि, सब कुछ देखा जाता है।
नामकरण
बहुत से परिवार जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण करते हैं, जबकि कुछ अपनी पारिवारिक परंपरा से कोई और दिन चुनते हैं। रिक्ता तिथि टाली जाती है, और नाम का पहला अक्षर अक्सर जन्म नक्षत्र के चरण से तय किया जाता है।
वाहन ख़रीद
नई गाड़ी के लिए शुभ तिथि, अच्छा वार और अनुकूल नक्षत्र देखा जाता है। पुष्य नक्षत्र को ख़रीदारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है, और कई लोग अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया में गाड़ी की डिलीवरी लेते हैं। राहु काल और भद्रा से बचा जाता है।
मुहूर्त के लिए पंडित से सलाह क्यों लें?
ऊपर बताई हर बात अलग-अलग देखने में आसान लगती है, लेकिन सही मुहूर्त इन सबको एक साथ तौलकर निकलता है। किसी दिन तिथि अच्छी हो सकती है पर भद्रा लगी हो, या नक्षत्र शुभ हो पर लग्न कमज़ोर हो। इसके अलावा परिवार के लोगों की कुंडली, शहर का सूर्योदय और क्षेत्रीय परंपराएँ भी असर डालती हैं।
अनुभवी पंडित इन सब बातों को मिलाकर आम तौर पर दो-तीन विकल्प देते हैं, जिनमें से आप अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकते हैं। आपके परिवार के पंडित जी की परंपरा में कुछ नियम थोड़े अलग भी हो सकते हैं, और वह बिल्कुल सामान्य है।
रोज़ की तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त और दिन के शुभ-अशुभ समय जानने के लिए आचमन ऐप का दैनिक पंचांग देख सकते हैं। मुहूर्त तय होने के बाद गृह प्रवेश, नामकरण या दूसरी पूजा के लिए ऐप से वेरिफ़ाइड पंडित भी बुक किए जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज का शुभ मुहूर्त कैसे पता करें?
छोटे कामों के लिए अपने शहर का पंचांग देखें, जिसमें तिथि, नक्षत्र, राहु काल और दिन के शुभ-अशुभ समय दिए होते हैं। अभिजीत मुहूर्त और चौघड़िया भी रोज़ के कामों में काम आते हैं। शादी, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे संस्कारों के लिए पंडित जी से पूरी गणना कराना बेहतर है।
अभिजीत मुहूर्त में कौन से काम कर सकते हैं?
अभिजीत मुहूर्त को ज़्यादातर शुभ कामों के लिए अच्छा माना जाता है, जैसे कोई नया काम शुरू करना, ज़रूरी कागज़ पर दस्तख़त या यात्रा पर निकलना, खासकर जब अलग से मुहूर्त न मिल रहा हो। परंपरा में बुधवार के अभिजीत मुहूर्त को आम तौर पर नहीं लिया जाता। विवाह जैसे बड़े संस्कारों के लिए पूरी गणना वाला मुहूर्त ही देखा जाता है।
क्या बिना मुहूर्त के गृह प्रवेश कर सकते हैं?
परंपरा में गृह प्रवेश को मुहूर्त देखकर करना अच्छा माना जाता है, इसलिए ज़्यादातर परिवार पंडित जी से दिन और समय निकलवाते हैं। अगर किसी मजबूरी में तुरंत घर में रहना पड़े, तो कई परिवार साधारण पूजा करके रहना शुरू कर देते हैं और बाद में शुभ मुहूर्त में विधिवत गृह प्रवेश पूजा कराते हैं। अपने पंडित जी से अपनी स्थिति के हिसाब से सलाह लें।
खरमास में कौन से काम नहीं किए जाते?
खरमास वह समय है जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है, और यह लगभग एक-एक महीने का होता है। इस दौरान आम तौर पर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए शुभ कामों की शुरुआत टाली जाती है। रोज़ की पूजा, जप, दान और धार्मिक पाठ खरमास में भी चलते रहते हैं।
चौघड़िया और मुहूर्त में क्या फ़र्क है?
चौघड़िया दिन और रात के 8-8 हिस्सों की एक तैयार सूची है, जो रोज़ के छोटे कामों, यात्रा या दुकान खोलने के लिए जल्दी काम आती है। पूरा मुहूर्त तिथि, नक्षत्र, योग, करण, लग्न और कभी-कभी कुंडली को मिलाकर निकाला जाता है। इसलिए बड़े संस्कारों के लिए पूरा मुहूर्त ही देखा जाता है।
लेखक: Achman Team · अपडेट: