विवाह संस्कार

शादी के लिए पंडित जी बुक करें

विवाह संस्कार को हिंदू परंपरा के सोलह संस्कारों में सबसे अहम माना जाता है, जिसमें अग्नि को साक्षी मानकर वर और कन्या जीवनभर साथ निभाने के वचन लेते हैं। इसमें गणेश पूजन, कन्यादान, फेरे और सप्तपदी जैसी रस्में होती हैं, जिन्हें अनुभवी पंडित परिवार की परंपरा के अनुसार कराते हैं।

विवाह संस्कार में क्या-क्या होता है

  1. गणेश पूजन और मंडप पूजन
  2. कन्यादान
  3. गठबंधन और पाणिग्रहण
  4. अग्नि स्थापना और हवन
  5. फेरे और सप्तपदी
  6. सिंदूरदान और मंगलसूत्र
  7. बड़ों का आशीर्वाद

कब करवाएं — मुहूर्त

विवाह का मुहूर्त वर और कन्या दोनों की कुंडली देखकर निकाला जाता है, जिसमें शुभ तिथि, नक्षत्र, लग्न और गुरु व शुक्र का उदित होना देखा जाता है। खरमास और चातुर्मास में आम तौर पर शादियाँ नहीं होतीं, और कई परिवार देवउठनी एकादशी के बाद से विवाह शुरू करते हैं। शादी के सीज़न में पंडितों की माँग बहुत रहती है, इसलिए तारीख तय होते ही बुकिंग कर लें।

आम तौर पर लगने वाली सामग्री

  • मंडप या वेदी और हवन कुंड
  • आम की लकड़ी, घी और हवन सामग्री
  • कलश, गंगाजल, नारियल और आम के पत्ते
  • रोली, हल्दी, चंदन, अक्षत और मौली
  • लावा (खील), जौ और काले तिल
  • सिंदूर, मंगलसूत्र और चुनरी
  • गठबंधन के लिए दुपट्टा या कपड़ा
  • जयमाला और फूल
  • सुपारी, पान के पत्ते, लौंग और इलायची
  • कपूर, धूप और दीपक
  • कन्यादान के लिए थाली, जल और फूल
  • फल और मिठाई

सही और पूरी सूची पंडित जी बुकिंग के समय ऐप में देते हैं — परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

आचमन पर बुक कैसे करें

  1. ऐप डाउनलोड करें और पूजा चुनें
  2. पंडित जी की प्रोफ़ाइल, अनुभव और भाषा देखें
  3. तारीख़ और समय तय करें, सामग्री की सूची पाएं
  4. ऐप में सुरक्षित भुगतान करें — रसीद ऐप में
सत्यापित पंडित जी बुक करेंप्रोफ़ाइल, अनुभव और भाषा देखें, और ऐप में ही बुक और भुगतान करें।ऐप में खोलें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हिंदू शादी की रस्मों में कितना समय लगता है?

फेरों समेत मुख्य विवाह संस्कार में आम तौर पर 2 से 4 घंटे लगते हैं। हल्दी, तिलक या मंडप जैसी पहले की रस्मों के लिए अलग समय चाहिए, जो हर परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

शादी में कितने फेरे होते हैं?

ज़्यादातर परंपराओं में अग्नि के सात फेरे और सप्तपदी के सात वचन होते हैं। कुछ समुदायों में फेरों की संख्या और क्रम अलग होता है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा पंडित जी को पहले से बता दें।

क्या शादी से पहले कुंडली मिलान ज़रूरी है?

बहुत से परिवार रिश्ता तय करने से पहले 36 गुणों वाला कुंडली मिलान कराते हैं, और मुहूर्त निकालने में भी दोनों की कुंडली काम आती है। यह पूरी तरह परिवार की आस्था और परंपरा पर निर्भर है।

क्या पंडित जी हमारी क्षेत्रीय परंपरा से शादी करा सकते हैं?

विवाह की रस्में क्षेत्र और समुदाय के हिसाब से काफ़ी बदलती हैं। आचमन पर पंडित जी की प्रोफ़ाइल में उनका अनुभव और भाषाएँ देखी जा सकती हैं, जिससे अपनी भाषा और परंपरा जानने वाले पंडित चुनना आसान होता है।

विवाह संस्कार के लिए पंडित जी आज ही बुक करें

सत्यापित पंडित जी, सामग्री की सूची और ऐप में सुरक्षित भुगतान।

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