मुंडन संस्कार

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मुंडन, जिसे चूड़ाकर्म संस्कार भी कहते हैं, हिंदू परंपरा के सोलह संस्कारों में से एक है, जिसमें बच्चे के जन्म के बाल पहली बार विधि से उतारे जाते हैं। परिवार इसे बच्चे की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना से कराते हैं।

मुंडन संस्कार में क्या-क्या होता है

  1. संकल्प और गणेश पूजन
  2. कलश स्थापना और कुल देवता का स्मरण
  3. मंत्रों के साथ बालों की पहली लट काटना
  4. नाई द्वारा मुंडन
  5. मुंडन के बाद सिर पर हल्दी या चंदन का लेप
  6. छोटा हवन (कई परिवारों में)
  7. बालों का नदी या मंदिर में अर्पण
  8. आशीर्वाद और प्रसाद

कब करवाएं — मुहूर्त

मुंडन आम तौर पर बच्चे के पहले, तीसरे या पाँचवें साल में किया जाता है, और कई परिवार अपनी कुल परंपरा के अनुसार उम्र तय करते हैं। मुहूर्त में शुभ तिथि, वार और नक्षत्र देखे जाते हैं, और खरमास व रिक्ता तिथियों से बचा जाता है। कुछ परिवार मुंडन कुल देवता के मंदिर या किसी तीर्थ पर कराते हैं, जबकि बहुत से घर पर ही कराते हैं।

आम तौर पर लगने वाली सामग्री

  • कलश, गंगाजल, नारियल और आम के पत्ते
  • रोली, हल्दी, चंदन, अक्षत और मौली
  • सुपारी, पान के पत्ते, लौंग और इलायची
  • धूप, दीपक, घी और कपूर
  • फूल, फूलमाला और दूर्वा
  • बच्चे के लिए नए कपड़े
  • बाल रखने के लिए साफ़ कपड़ा या आटे की लोई
  • सिर पर लगाने के लिए हल्दी या चंदन का लेप
  • हवन कुंड, लकड़ी और हवन सामग्री (अगर हवन हो)
  • फल और मिठाई
  • चौकी और आसन

सही और पूरी सूची पंडित जी बुकिंग के समय ऐप में देते हैं — परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

आचमन पर बुक कैसे करें

  1. ऐप डाउनलोड करें और पूजा चुनें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुंडन किस उम्र में करना चाहिए?

उत्तर भारत में मुंडन आम तौर पर पहले, तीसरे या पाँचवें साल में, यानी विषम वर्ष में कराया जाता है। कई परिवारों की अपनी कुल परंपरा होती है, इसलिए घर के बड़ों और पंडित जी से बात करके उम्र तय करें।

क्या मुंडन घर पर करा सकते हैं?

हाँ, बहुत से परिवार घर पर ही मुंडन कराते हैं, जबकि कुछ परिवारों में इसे कुल देवता के मंदिर या किसी तीर्थ पर कराने की परंपरा है। घर पर कराने से छोटा बच्चा जाने-पहचाने माहौल में आराम से रहता है।

मुंडन के बालों का क्या करते हैं?

परंपरा में मुंडन के बाल आटे की लोई या साफ़ कपड़े में इकट्ठा करके किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किए जाते हैं या मंदिर में अर्पित किए जाते हैं। इसका तरीका परिवार की परंपरा के हिसाब से अलग हो सकता है।

क्या मुंडन में चोटी (शिखा) छोड़ी जाती है?

कई परिवारों में मुंडन के समय सिर के पीछे थोड़े बाल शिखा के रूप में छोड़े जाते हैं, जबकि कुछ परिवार पूरे बाल उतारते हैं। यह कुल परंपरा पर निर्भर है, इसलिए इसे पहले से तय कर लें।

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