राहु काल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह समय है जिसे पंचांग में नया या शुभ काम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है। इसे निकालने के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और वार के हिसाब से इनमें से एक हिस्सा राहु काल होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त हर शहर और हर मौसम में अलग होते हैं, इसलिए आज का राहु काल भी आपके शहर के हिसाब से बदल जाता है।
राहु काल क्या है?
राहु नवग्रहों में से एक छाया ग्रह है। ज्योतिष में इसे भ्रम, रुकावट और अचानक आने वाले मोड़ से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि दिन के जिस हिस्से पर राहु का प्रभाव होता है, उसमें शुरू किया गया नया काम अक्सर मनचाहे ढंग से पूरा नहीं होता या उसमें अड़चनें आती हैं।
दक्षिण भारत में राहु काल, जिसे राहु कालम भी कहते हैं, बहुत गंभीरता से माना जाता है। अब उत्तर भारत में भी बहुत से परिवार किसी ज़रूरी शुरुआत से पहले इसे देखने लगे हैं। उत्तर भारत में इसे आम तौर पर चौघड़िया और दिन के मुहूर्त के साथ देखा जाता है।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
इसकी गणना बहुत सीधी है:
- अपने शहर का आज का सूर्योदय और सूर्यास्त का समय लें।
- दोनों के बीच का कुल समय निकालें, जिसे दिनमान कहते हैं।
- दिनमान को 8 से भाग दें। इससे एक हिस्से की लंबाई मिल जाएगी।
- वार के हिसाब से तय हिस्सा ही उस दिन का राहु काल है।
वार के हिसाब से क्रम यह है:
- सोमवार: दूसरा हिस्सा
- शनिवार: तीसरा हिस्सा
- शुक्रवार: चौथा हिस्सा
- बुधवार: पाँचवाँ हिस्सा
- गुरुवार: छठा हिस्सा
- मंगलवार: सातवाँ हिस्सा
- रविवार: आठवाँ हिस्सा
ध्यान दें कि दिन का पहला हिस्सा किसी भी वार को राहु काल नहीं होता। यानी सूर्योदय के ठीक बाद का समय हमेशा राहु काल से मुक्त रहता है।
उदाहरण से समझिए। मान लीजिए सर्दी के किसी दिन लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:40 और सूर्यास्त शाम 5:20 पर है। दिनमान हुआ 10 घंटे 40 मिनट, यानी 640 मिनट। इसे 8 से भाग देने पर हर हिस्सा 80 मिनट का हुआ, और अगर उस दिन सोमवार है तो दूसरा हिस्सा सुबह 8:00 से 9:20 तक रहेगा। यही उस दिन का राहु काल है।
हर वार का राहु काल लगभग कब होता है?
अगर सूर्योदय सुबह 6 बजे और सूर्यास्त शाम 6 बजे मान लें, तो हर हिस्सा ठीक डेढ़ घंटे का होगा और राहु काल मोटे तौर पर इस समय आएगा:
- सोमवार: सुबह 7:30 से 9:00
- मंगलवार: दोपहर 3:00 से 4:30
- बुधवार: दोपहर 12:00 से 1:30
- गुरुवार: दोपहर 1:30 से 3:00
- शुक्रवार: सुबह 10:30 से दोपहर 12:00
- शनिवार: सुबह 9:00 से 10:30
- रविवार: शाम 4:30 से 6:00
राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा के अनुसार राहु काल में इन कामों की शुरुआत टाली जाती है:
- नया व्यापार, नई दुकान या नई नौकरी शुरू करना।
- गृह प्रवेश, सगाई या कोई दूसरा शुभ संस्कार।
- नई गाड़ी, मकान, सोना या कोई बड़ी चीज़ ख़रीदना।
- किसी ज़रूरी यात्रा की शुरुआत।
- किसी बड़े समझौते या ज़रूरी कागज़ पर दस्तख़त।
राहु काल में रोज़ के काम, दफ़्तर का काम, पहले से चल रहा कोई काम या डॉक्टर के पास जाना रोकने की ज़रूरत नहीं है। यह नियम सिर्फ़ नई और शुभ शुरुआत के लिए है। बहुत से लोग इस समय भगवान का नाम लेना या जप करना अच्छा मानते हैं, और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में राहु काल में दुर्गा पूजा की परंपरा भी है।
राहु काल हर शहर में अलग क्यों होता है?
राहु काल घड़ी के किसी तय समय से नहीं, बल्कि सूरज से जुड़ा है। भारत पूरब से पश्चिम तक काफ़ी फैला हुआ है, इसलिए गुवाहाटी में सूरज मुंबई से काफ़ी पहले उग जाता है, जबकि घड़ी पूरे देश में एक ही समय (IST) दिखाती है। मौसम के साथ भी दिन छोटे-बड़े होते हैं: गर्मियों में दिन लंबा होता है तो हर हिस्सा डेढ़ घंटे से ज़्यादा का होता है, और सर्दियों में उससे कम का।
इसीलिए दिल्ली का राहु काल लखनऊ, पटना या भोपाल के लिए सटीक नहीं होगा। हमेशा अपने शहर का समय ही देखें।
आचमन ऐप के दैनिक पंचांग में तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त और दिन के शुभ-अशुभ समय एक ही जगह मिल जाते हैं। इससे सुबह-सुबह पूरे दिन की योजना बनाना आसान हो जाता है।
यमगंड और गुलिक काल क्या हैं?
राहु काल की तरह यमगंड और गुलिक काल भी दिन के 8 हिस्सों में से ही निकाले जाते हैं, बस हर वार के लिए इनका हिस्सा अलग होता है। यमगंड को भी राहु काल की तरह शुभ काम के लिए टाला जाता है।
गुलिक काल के बारे में मान्यता है कि इसमें किया गया काम दोहराया जाता है। इसलिए कुछ लोग इसमें ऐसे काम नहीं करते जिन्हें वे दोबारा नहीं चाहते, जैसे अंतिम संस्कार से जुड़े काम या कर्ज़ लेना। ये दोनों समय ज़्यादातर दक्षिण भारत में देखे जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज राहु काल कितने बजे है?
राहु काल का समय हर दिन और हर शहर में अलग होता है, क्योंकि यह उस दिन के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से निकलता है। दिनमान को 8 हिस्सों में बाँटें और वार के हिसाब से तय हिस्सा देखें, जैसे सोमवार को दूसरा और रविवार को आठवाँ। अपने शहर का दैनिक पंचांग देखना सबसे आसान तरीका है।
क्या रात में भी राहु काल होता है?
आम तौर पर लोग दिन वाला राहु काल ही मानते हैं, जो सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच होता है। कुछ पंचांग सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय को भी 8 हिस्सों में बाँटकर रात का राहु काल निकालते हैं। व्यवहार में ज़्यादातर परिवार रात वाले राहु काल पर उतना ध्यान नहीं देते।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
रोज़ की पूजा, आरती, जप और भगवान का स्मरण राहु काल में भी किया जा सकता है। परंपरा में नया संकल्प लेकर किए जाने वाले शुभ संस्कार, जैसे गृह प्रवेश या सगाई, इस समय टाले जाते हैं। दक्षिण भारत में तो राहु काल में दुर्गा पूजा की ख़ास परंपरा भी है।
अगर यात्रा राहु काल में ही शुरू करनी पड़े तो क्या करें?
अगर यात्रा टालना संभव न हो तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। कुछ परिवार प्रस्थान की परंपरा मानते हैं, यानी असली यात्रा से पहले किसी शुभ समय में अपना कोई सामान घर से बाहर रख देते हैं, और कुछ लोग भगवान का नाम लेकर निकल जाते हैं। नौकरी, ज़रूरी काम या इलाज से जुड़ी यात्रा को राहु काल की वजह से टालना ज़रूरी नहीं।
राहु काल और चौघड़िया में क्या फ़र्क है?
राहु काल दिन का सिर्फ़ एक अशुभ हिस्सा बताता है, जबकि चौघड़िया पूरे दिन और रात को 8-8 हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को अमृत, शुभ, लाभ, चर, काल, रोग या उद्वेग का नाम देता है। दोनों की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त से होती है। उत्तर और पश्चिम भारत में चौघड़िया ज़्यादा देखा जाता है, जबकि दक्षिण में राहु काल।
लेखक: Achman Team · अपडेट: